शनिवार, 18 जून 2016

संवेग: रघुराम बाहर, चेतन अंदर !!

संवेग: रघुराम बाहर, चेतन अंदर !!: भाई अपनी अपनी पसंद है हमारी मर्ज़ी जिसे चाहें निकाले जिसे चाहें रक्खें ....... आपसे क्या मतलब ? देश तो चलता रहेगा ये सब तो रोज की बात है राज...

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